Kavita · Hindi (हिन्दी)
स्वर्णिम हिमाचल
Swarnim Himachal
बर्फ से ढकी वो पर्वत रेखा,
हरियाली में बसी स्नेह की लेखा।
नदियाँ गाती हैं शुद्ध सुरों में,
धरती मुस्काए स्वर्ण रंगों में।
कुल्लू की घाटी, किन्नौर का मान,
शिमला की शान, धर्मशाला का गान।
हर कोना है जैसे कोई व्रत,
संस्कृति से सजी हर एक पगवट।
बोलते हैं देवता यहाँ की वाणी,
लोकगीतों में बसी है प्रेम कहानी।
पग-पग में है वीरों की गाथा,
स्वर्णिम हिमाचल की यही है परिभाषा।
जन-जन के श्रम से बना ये ताज,
प्रकृति और परंपरा का साज।
हिमालय की गोद में बसा है जो,
वो स्वर्णिम हिमाचल, हमारा अभिमान हो।