Kavita · Hindi (हिन्दी)
मेरा लक्ष्य मार्ग
Mera Lakshya Marg
जो ढूँढता रहा मैं जुनून यहाँ-वहाँ से,
वो अंत में पाया मैने सिर्फ खुद ही से।
तब से मैं स्वप्न रुपी जिन्दगी से जाग गया,
आँगन आती मुश्किलों से ना भाग गया।
मंशा तो मेरी थी कि भारत को उड़ाऊँ मैं,
अपना जोश हर नये युवा को दिखाऊँ मैं।
पर, इस अंतहीन-जग में असंख्य जीवन-इतिहास,
कई लोग करते रहे मेरी निंदा और उपहास।
जीवन में मेल हुआ उन लोगों से, जिनकी बुरी रीति,
पर मेरी लक्ष्य पाने की जोश में थी चाणक्य निति।
फिर प्रश्न उठा खुद पर कि,
इस छोटे से जीवन की कथा कैसे आज कहूँ ?
क्या यह अच्छा नही कि औरों की सुन मौन रहूँ ??
भटक चुका था, कहाँ खुदसे कि यार मैं कौन हूँ ???
पर हटाया सब प्रश्न,
बस चूप रहकर लिखता गया अपनी कविता,
अब समय भी नही थकी है मेरी मौन व्यथा।
कहा खुद से, कहा दिल से,
तू हमारे देश का उज्जवल सितारा है,
तू हमारे देश को चमकाने वाला तारा है,
'बाल कवि' इस जग को तू प्यारा है।
भारत को तू उड़ा सकता है,
भारत को प्रगति की ओर मुड़ा सकता है।