الفاظ alfaazsujalke

Kavita · Hindi (हिन्दी)

माँ

Maa (Aanchal se ghaam chhaanti)

आँचल से घाम छांटती,
रात को चिंता हर लेती है,
दर्द छुपाकर हंसती,
मेरी हर धड़कन में बसती है।

खुद चाँद से सपने चुरा लाती,
मेरे बिखरे जहाँ को सजाती है,
एक परी-सी लगती वो,
मेरी खामोशी को समझ पाती है।

हवाओं से गुफ्तगू करती,
मेरी जिंदगी की नाव चलाती है,
कभी लोरियों से सुलाती,
कभी डांटकर सही राह दिखाती है।

क्यों माँ ऐसी होती है,
हर आँसू में दुआएं पिरोती है,
खुद टूटकर भी रहती,
प्यार का हर दीप जलाती है।

उसके आँचल की सफाई,
मेरी हर गलती को धोती है,
उन आँखों में सपनों का दर्पण,
बस मेरी ही जीत मनाती है।

कोई भी ग़म हरा नहीं सकता,
वो अपना हाथ जो साथ रखती है,
माँ दूर ना हो कभी,
क्योंकि माँ की ममता बेशकीमती है।