Nazm · Urdu (उर्दू)
जुनून-ए-इश्क
Junoon-e-Ishq
✦ 1st position, IIITians Network (2024) · Gold Medal, 21st National Poetry Contest, S7 Poetry
ज़माना निकल गया, ज़मानत दिलाने में,
जर में जंग लग गया, तुझको मनाने में,
जिया फीकी पड़ गई, ज़ियारत भी निकल गई,
ज़ालिम ज़लाल ज़लील हुआ, जुल्फ़ संवारने में,
ये दिल अब-भी लगा है, तुझको मनाने में।
तब्दील हो गई लाखों की, ताज़ा ख़बर में,
ये ताक भी तबाह हो गई, तेरे सबर में,
तश्रीफ से तस्लीम तेरी तस्वीर को,
तख्त में रख दिया, मेरे छोटे बसर में,
ये दिल अब-भी लगा है, तेरे खबर में।
दाखिला ना देने से तुने, शायद दाद ना किया,
दार पर चड़ गया, जो दामन ना दिया,
दाना-दाना, तिनका-तिनका दर-बदर,
दास्तां तुझे मैं ढूँढता-ढूँढता ही गया,
आखिर तुने क्या, दिल में दाग ही दिया।