الفاظ alfaazsujalke

Ghazal · Urdu (उर्दू)

वाक़िफ़ है तेरा नूर

Waakif Hai Tera Noor

गर ग़ज़ाला को तेरा नाज़ पसंद हो, तो वाक़िफ़ है,
हुस्न-ए-नूर को तेरा नूरानी चेहरा पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।
चाँद भी तुझमें उतरता है खुद को सँवारने,
और सितारों को भी तेरी आँखों का दरिया पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।
तेरी ज़ुल्फ़ों और लबों की बात हर दिल में दस्तक दे,
इश्क़ का हर क़ायदा तुझे बेपनाह पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।
हर सूरत में तेरा अक्स नज़र आए जहाँ को,
आईनों को भी बस तेरा जहान पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।
तू नक़्श-ए-ख़ुदा लगे, हर अंदाज़ में इबादत हो,
अगर सज्दों को भी तेरा अरमान पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।
दिल से पूछो तो तेरी यादों का जादू ही काफी है,
अगर ख़्वाबों को भी तेरा ईमान पसंद हो, तो वाक़िफ़ है।