Nazm · Urdu (उर्दू)
मेरी नादान कलम
Meri Nadaan Kalam
मेरी नादान कलम है, थोड़ी सी बावरी,
नाचे कागज़ के आंगन में, पागल सी शायरी।
इश्क़ के गीत लिखे, या ग़म की दास्तान,
हर जज़्बे को उतारे, ये रंगों की मेहरबान।
कभी डूबी मोहब्बत में, कभी छलकी आँख से,
जो दिल में है छुपा सारा, उजागर कर दे वैसे।
हँसती भी है, रोती भी है, ये कलम मेरी साथी,
मीठी सी इक गुफ्तगू में, दुनिया कर दे पाती।
थोड़ी नादान सही, पर सच्चे हैं इसके बोल,
सियाही से लिखती है जो, दिल कहता उसे अनमोल।
" सूजल" की तरह, ये भी झूमती है इक नशे में,
लफ़्ज़ों का है सहारा, बस वही है दिल के क़रीब इसके।
मेरी नादान कलम है, थोड़ी सी बावरी,
नाचे कागज़ के आंगन में, पागल-सी शायरी।