Kavita · Hindi (हिन्दी)
पंखों की चाहत
Pankhon ki Chahat
नन्ही सी चिड़िया, डाली पर बैठी,
आसमान को देख, आहें भरती।
इतनी ऊंचाई कैसे पाऊं,
पंख लगाकर मैं भी उड़ जाऊं।
फूलों से बोली, "रंग तुम्हारे,
हवाओं में बन कर खुशबू उड़ते।
मैं भी ऐसे भटकूं दुनिया में,
कोई रोक ना टोक ना हो मुझको।"
तितली आई, रंग-बिरंगी,
चिड़िया की सुन कर बातें तरंगी।
"पंख तो मेरे भी हैं छोटे से,
पर दुनिया देखी मैंने सारे से।"
चिड़िया ने कहा, "सच में बताओ,
कैसे दूर के सपने तुम पाओ?"
तितली हंसी, "सपने हैं तो उड़ान है,
चाहत हो दिल में, तो आसमान है।"