الفاظ alfaazsujalke

Kavita · Hindi (हिन्दी)

अलंकारों की दुनिया में

Alankaron ki Duniya Mein

अलंकारों की दुनिया में, मैं अनुप्रास की शान,
वर्णों के मोती पिरोकर, रचता हूँ मैं गान।

कल कल करती सरिता की धारा,
कोमल कलियों में छुपा पसारा,
कभी किलकारी खिलखिलाती है,
कभी कदम कदम कोमल बढ़ाती है।

तरल ताल पर थिरकते पायल,
झुमकों की झंकार मदहोश कर जाए।
मयूर का मादक नृत्य मनभावन,
मोतियों की माला सा ये जग सुहावन।

मिलन की मधुरता, विरह की टीस,
अनुप्रास की मिठास, उड़ेलती रस की सीस।
शब्दों की सौंधी खुशबू, अर्थों की गहराई,
चहचहाते परिंदों सी, मन में उमंग समाई

नभ के नन्हें तारे जगमगाते,
चाँद की चांदनी में रात नहाते,
नूर से नूरानी ये फिज़ा सजी है,
अनुप्रास के मोतियों से दुनिया रची है।